Saturday, January 15, 2011

समुद्र पार करना


आप केवल लहरों को सतत निहारते हुये समुद्र पार नहीं कर सकते!
~ रवीन्द्रनाथ ठाकुर

1 comments:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत गहरी बात।

आभार।

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डा0 अरविंद मिश्र: एक व्‍यक्ति, एक आंदोलन।
एक फोन और सारी समस्‍याओं से मुक्ति।