Thursday, December 17, 2009

अनासक्त रस भोगी


मही नहीं जीवित है मिट्टी से डरने वालों से
ये जीवित है इसे फूंक सोना करने वालों से
ज्वलित देख पंचाग्नि जगत से निकल भागता योगी
धूनी बना कर उसे तापता अनासक्त रस भोगी।

~ दिनकर जी की कविता

Sunday, December 13, 2009

बदलाव


आप साल दर साल वही व्यक्ति बने रहेंगे; सिवाय इसके कि आप किन लोगों से मिलते हैं, कौन सी पुस्तकें पढ़ते हैं और कैसी ब्लॉग पोस्टें नियमित लिखते हैं!

Tuesday, November 24, 2009

अपनी परेशानियों की चर्चा


दूसरों से अपनी परेशानियों व समस्याओं की चर्चा उनकी सहानुभूति तथा सहयोग पाने के लिये न करें. एक रिटयर्ड अमेरिकन एडमिरल की सीख पर ध्यान दें - जिनसे आप अपनी तकलीफों की चर्चा करते हैं, उनमें से आधों को कोई फ़िक्र नहीं कि आप पर क्या गुजरती है. शेष आधे लोग उससे बहुत प्रसन्न होते हैं.

~ माधव पण्डित की सीख का उल्लेख, मानसिक हलचल पर।

व्यक्ति में महाभारत


गिरिजेश - कुकुर छोड़ गए, युधिष्ठिर जी कहाँ गए?
ज्ञानदत्त - ...सभी, पाण्डव-कौरव-कृष्ण, व्यक्ति में इण्टर्नलाइज हो गये हैं। महाभारत व्यक्ति के अन्दर हो रहा है!
~ मानसिक हलचल की टिप्पणियों में।





Monday, November 23, 2009

सफलता


तैयारी और अवसर जहां मिलते हैं; सफलता वहीं निवास करती है!


Sunday, November 22, 2009

सही

क्या सही है, वह कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है बनिस्पत कौन सही है के!

Monday, November 16, 2009

सीखना

सीखना यही है - आप अचानक एक बात समझ जाते हैं। वह बात जो आप पूरी जिन्दगी दूसरे प्रकार से समझते रहे हैं। बस, समझते हैं अब दूसरे प्रकार से!
~ डोरिस लेसिंग, रीडर्स डाइजेस्ट में उद्धृत।