Monday, April 11, 2011

यात्राओं की खोज


असली यात्राओं की खोज इस पर निर्भर नहीं करती कि कौन से और कितने नये दृष्य हमने देखे। यह निर्भर करती है कि हमने नई आंखें पाई या नहीं!
~ मार्सेल प्राउस्ट।

2 comments:

Mrs. Asha Joglekar said...

सही कहा पर हम तो बाहरी दृष्यों में ही खो जाते हैं नई आँखें कितनों को मिलती हैं ?

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

बेहतरीन संदेश