Saturday, May 1, 2010

दौड़


गरीब सोचते हैं, अमीर हो जायें। अमीर सोचते हैं, ज्ञानी हो जायें। भोगी सोचते हैं, त्यागी हो जायें। अविवाहित सोचते हैं, विवाहित हो जायें। विवाहित सोचते हैं, मर जायें, कैसे मर जायें, कब मर जायें। जो नहीं है, उसकी तरफ दौड़ बनी रहती है।
~ आचार्य रजनीश।

1 comments:

देव कुमार झा said...

सही है, वर्तमान से असंतुष्टता...
मगर कुछ निगेटिव भी लगी...