Monday, September 28, 2009

क्षमा



एक कमजोर आदमी कभी क्षमा नहीं कर सकता। क्षमा तो समर्थवान का गुण है।
~ मोहनदास कर्मचन्द गांधी।

क्षमा सोहती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो।
उसको क्या, जो दन्त हीन, विषरहित, विनीत सरल हो।
~ दिनकर।


1 comments:

जी.के. अवधिया said...

क्षमा बड़न को चाहिए छोटन को उत्पात।
कह रहीम प्रभु का गयो जो भृगु मारी लात॥