Sunday, September 12, 2010

प्रिय वचन और नाश


सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस ।
राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास ॥

भय या लाभ की आशा वश; सचिव, वैद्य और गुरु अगर प्रिय वचन बोलते हैं; तो राज, धर्म और तन का शीघ्र नाश होना अवश्यम्भावी है। - तुलसीदास।

Saturday, September 11, 2010

घड़ियां और समय


पुराने समय में लोगों के पास घड़ियां नहीं होती थीं, पर सबके पास समय था। आज सबके पास घड़ियां ही घड़ियां हैं, पर कितना दुखद है कि उनके पास समय नहीं है! :(

Wednesday, August 18, 2010

सत्य



सत्य वह मुद्रा है, जिसे आप किसी भी लोक में भंजा सकते हैं।

Tuesday, August 3, 2010

पर्वत उखाडना


वह व्यक्ति, जो पर्वत उखाड़ता है; शुरुआत छोटे पत्थरों को हटाने से करता है।
~ चीनी कहावत।

Monday, July 12, 2010

मनोहारी समय


भगवान करें, आप मनोहारी समय में जियें (May you live in interesting times)!
~ एक चीनी शाप।

Sunday, July 11, 2010

शुद्धता


अन्तत:; आपके मन की शुद्धता से पवित्र कोई अन्य चीज नहीं होती।
~ राल्फ वाल्डो एमर्सन।

Sunday, July 4, 2010

बहाना


सामान्यत: वे लोग जो बहाना बनाते हैं, उनमें एकाग्रता और अनुशासन की कमी होती है। उनके लिये असफलतायें अवश्यम्भावी हैं और दुर्दशा उनकी चुनी हुई अवस्था है।
~ स्टीफन कोवी।